



डेस्क खबर कोरबा ../ हादसा सड़क पर हुआ, लेकिन 12 घंटे तक जो हुआ, उसने पूरे हाईवे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए! NH-130 पर दो ट्रेलरों की भिड़ंत हुई, बिलासपुर-अंबिकापुर मार्ग जाम हो गया और सैकड़ों यात्री घंटों सड़क पर फंसे रहे। बसों के पहिए थम गए, एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं की आवाजाही प्रभावित हुई, लेकिन जिस व्यवस्था पर हाईवे को सुचारु रखने और आपात स्थिति में राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी है, उसी की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई।
मदनपुर घाट का यह महाजाम सिर्फ वाहनों की कतार नहीं था, बल्कि आपातकालीन व्यवस्था की तैयारियों का इम्तिहान भी था।
हादसा हुआ, पुलिस ने मदद मांगी… NHAI के फोन बंद!
बांगो थाना क्षेत्र की मोरगा चौकी अंतर्गत मदनपुर घाट पर दो ट्रेलरों की भिड़ंत के बाद हालात बिगड़ गए। जाम खुलवाने और राहत कार्य में तेजी लाने के लिए पुलिस ने NHAI से संपर्क करने की कोशिश की।
कटघोरा एसडीओपी विजय सिंह राजपूत के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिले। अब सवाल यह है कि जब नेशनल हाईवे पर हादसा हो और यातायात घंटों ठप पड़ा रहे, तब जिम्मेदार अधिकारी कहां थे? क्या हाईवे की जिम्मेदारी सिर्फ टोल वसूलने और कागजों पर व्यवस्था दिखाने तक सीमित है?
जनता सड़क पर परेशान होती रही और राहत व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे। आखिरकार पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए NHAI के खिलाफ धारा 222A BNS के तहत न्यायालय में परिवाद दायर किया।
NHAI की जांच में एजेंसी पर सवाल, 10 लाख का जुर्माना!
मामला यहीं नहीं थमा। NHAI की जांच में संबंधित एजेंसी की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां मिलने की बात सामने आई। घटनास्थल पर प्रबंधक मौजूद नहीं था, क्रेन ऑपरेटर गायब था और आपातकालीन सहायता के लिए निर्धारित 1033 हेल्पलाइन की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठे।
इसके बाद NHAI ने संबंधित एजेंसी मेसर्स रविन्द्र सिंह पर 10 लाख रुपये की पेनल्टी लगा दी।
लेकिन सवाल सिर्फ जुर्माने का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है, जो हादसे के बाद जाम हटाने, क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने और यातायात बहाल करने के लिए जिम्मेदार है। जब मौके पर प्रबंधक और क्रेन ऑपरेटर ही उपलब्ध न हों, तो आपातकालीन प्रबंधन की तैयारी पर सवाल उठना लाजिमी है।
12 घंटे जनता हलकान, अब जवाबदेही किसकी?
बिलासपुर से अंबिकापुर जाने वाले यात्रियों के लिए NH-130 एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में इस मार्ग पर 12 घंटे तक यातायात बाधित रहना मामूली घटना नहीं है। जाम में फंसे यात्रियों का समय, परेशानी और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ने वाला असर—इन सबकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
पुलिस ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और NHAI ने एजेंसी पर जुर्माना लगाया है। लेकिन अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या कार्रवाई के बाद व्यवस्था सुधरेगी, या अगली दुर्घटना में भी लोगों को इसी तरह घंटों सड़क पर फंसे रहने का सामना करना पड़ेगा?
