आधे अधूरे वीडियो का पूरा सच आया सामने ! महिला डॉक्टर द्वारा मरीज को देखने से इंकार:!
महिला डाक्टर से नही हुई थी अभद्रता ! सुनिए मामले की पूरी हकीकत.! स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता**


डेस्क खबर ./ दिनांक 07-09-2024 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पंडरिया में एक गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा। एक महिला मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी, और उसे तत्काल इलाज की जरूरत थी। मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन वहाँ डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। डॉक्टर को फोन के माध्यम से बुलाया गया, और लगभग आधे घंटे बाद डॉक्टर वहां पहुंचीं। अपने परिवार के सदस्य की गंभीर हालत के बाद परिजनों ने कई बार महिला डाक्टर से फरियाद भी लगाई थी लेकिन महिला डाक्टर ने प्रोटोकाल की बात कह कर मरीज को देखने से इंकार कर दिया था । और उसके बाद एक आधा अधूरावीडियो वायरल हुआ था जिसमे लोकल कांग्रेस नेता के ऊपर महिला डाक्टर से अभद्रता का आरोप लगाया था । लेकिन खबर के बाद एक वीडियो और सामने आया है जिसमे साफ साफ देखा और सुना जा सकता है की परिजनों ने गुहार का महिला डाक्टर के ऊपर कोई फर्क नही पड़ा था और नेता ने संयम से बात चीत करते हुए डाक्टर को अनुरोध भी किया था
डॉक्टर ने आकर बैठते ही कहा कि मरीज को भर्ती करना पड़ेगा। परिजनों ने निवेदन किया कि पहले डॉक्टर मरीज को देख लें, उसके बाद भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। लेकिन डॉक्टर ने अपने कर्मचारियों को मरीज देखने का निर्देश देते हुए, यह कह दिया कि उनका काम केवल दवाइयों की पर्ची लिखना है, जो कि उनके सीनियरों ने उन्हें सिखाया है। यह स्पष्ट रूप से वीडियो में भी सुना जा सकता है। परिजनों ने बार-बार अनुरोध किया, लेकिन डॉक्टर ने मरीज को देखने से इंकार कर दिया।
इस स्थिति ने परिवार वालों में गहरा असंतोष उत्पन्न किया और उन्होंने तुरंत BMO पंडरिया और CMHO को शिकायत दर्ज कराई। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर समस्याएं हैं। डॉक्टरों द्वारा मरीजों के प्रति इस प्रकार की लापरवाही न केवल अनुचित है, बल्कि यह जनता के प्रति उनके कर्तव्यों की अनदेखी भी है। डॉक्टरों को भगवान का स्वरूप माना जाता है, और ऐसी घटनाएं इस मान्यता को धूमिल करती हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए यह जरूरी है कि ऐसे लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। डॉक्टरों का पेशेवर और मानवतावादी कर्तव्य है कि वे हर मरीज को उचित देखभाल प्रदान करें। इसके लिए न केवल उनके प्रशिक्षण में सुधार की आवश्यकता है, बल्कि उन्हें कठोर निगरानी और जवाबदेही के दायरे में लाना भी अनिवार्य है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों।