डेस्क खबरबिलासपुर

70 लाख का चखना ठेका, फिर तालेबंदी! अवैध दुकानों पर चुप्पी क्यों? आबकारी विभाग कटघरे में…अवैध चखना दुकानों पर सवालों की बौछार, जवाब देने से बच रहे जिम्मेदार! सहायक आबकारी आयुक्त आखिर क्यों चर्चा में ??



डेस्क खबर बिलासपुर../   बिलासपुर जिले में कहीं चखना सेंटर के लिए 70 लाख की बोली, कहीं 60 लाख का ठेका और अब आधे से ज्यादा सेंटर बंद होने की जानकारी! दूसरी तरफ शराब दुकानों के आसपास अवैध चखना सेंटर संचालित होने और कथित वसूली की शिकायतें। इसके बावजूद आबकारी विभाग से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में सवाल है—आखिर बिलासपुर के आबकारी विभाग में चल क्या रहा है?
जिले की 64 और जीपीएम की दो शराब दुकानों के चखना सेंटरों के लिए कुल 66 ठेकों की नीलामी हुई थी। तोरवा में 70 लाख और चुचुहियापारा में 60 लाख रुपये तक की बोली लगी। लेकिन अब बिलासपुर में महज 30 से 32 सेंटर संचालित होने की जानकारी सामने आ रही है।
लाखों की बोली वाले ठेके बंद क्यों हुए? कितने ठेके सरेंडर हुए? सरकारी खजाने में कितनी राशि आई और कितने राजस्व का हिसाब बाकी है? इन सवालों पर विभाग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
अवैध चखना सेंटरों पर कार्रवाई कहां है?
शराब दुकानों के आसपास अवैध चखना सेंटर चलने और कथित वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं। लेकिन कितनी शिकायतें मिलीं, कितनी जांच हुई और कितने सेंटरों पर कार्रवाई की गई—इसका स्पष्ट ब्योरा सामने नहीं है। यदि शिकायतें गलत हैं, तो विभाग तथ्य रखे। यदि सही हैं, तो कार्रवाई का हिसाब दे। आखिर निगरानी करने वाले अधिकारी किस बात की जिम्मेदारी निभा रहे हैं?
सहायक आबकारी आयुक्त नवनीत तिवारी भी पूरे मामले को लेकर चर्चा में है। मीडियाकर्मियों का आरोप है कि सहायक आबकारी आयुक्त न तो जानकारी देते है और ना ही मीडियाकर्मियों का फोन रिसीव करना मुनासिब समझते है इतना ही नहीं आफिस में मौजूदगी के बाद भी मीडियाकर्मियों को घंटों आफिस में बैठाकर नहीं मिलने के आरोप भी लगे है। वही आबकारी कार्यालय में मौजूद अन्य आबकारी अफसर इस मामले में सहायक आबकारी आयुक्त से मामले की जानकारी लेने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते है।
इस मामले में सहायक आबकारी आयुक्त नवनीत तिवारी की जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि चखना सेंटरों और अवैध दुकानों की स्थिति को लेकर संपर्क करने पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। कार्यालय में उपलब्धता को लेकर भी शिकायतें हैं।
सवाल सीधा है—जिले में कितने सेंटर वैध हैं, कितने बंद हैं और अवैध दुकानों के खिलाफ कितनी कार्रवाई हुई? क्या सहायक आबकारी आयुक्त इन सवालों का जवाब देंगे, या जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर मामला टाल दिया जाएगा?
मार्च 2027 में अगली नीलामी प्रस्तावित है। उससे पहले पुराने ठेकों, राजस्व और कार्रवाई का पूरा हिसाब सामने आना चाहिए। आबकारी आयुक्त से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक, जवाबदेही तय होना जरूरी है। वही तमाम आरोपों पर जब सहायक आबकारी आयुक्त नवनीत तिवारी से मामले में पक्ष जानने के लिए मुलाकात करने की कोशिश की तो उन्होंने न तो मिलना मुनासिब समझा और ना ही फोन में जानकारी देने के लिए फोन रिसीव करना मुनासिब समझा जिसके कारण विभाग से लेकर मीडिया के बीच उनकी कार्यशैली और अवैध चखना सेंटर चर्चा का विषय बने हुए है।

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