एक तरफ सेवा संकल्प के दीप, दूसरी तरफ रामनगर में बुनियादी सुविधाओं का अंधेरा*




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डेस्क खबर कोंटा।* एक तरफ सरकार सेवा संकल्प सप्ताह के नाम पर दीप जला रही है, तो दूसरी तरफ सुकमा जिले के कोंटा तहसील के सुदूर गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।
मामला ग्राम पंचायत कोट्टाचेरू के आश्रित ग्राम रामनगर का है। यहां आज तक पक्की सड़क तक नहीं बनी है। सड़क नहीं होने के कारण बीमार आदिवासी ग्रामीणों को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को देसी जुगाड़ का सहारा लेना पड़ रहा है। चारपाई और बाइक से मरीजों को ढोया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, कीचड़ और गड्ढों के कारण गांव पूरी तरह टापू बन जाता है। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की हालत बिगड़ जाती है।
सवाल यह उठता है कि जब गांव के लोग इलाज के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं, तो प्रशासन को इनकी तकलीफ क्यों नजर नहीं आती? सेवा संकल्प का असली मतलब दीप जलाने से नहीं, बल्कि जरूरतमंदों तक सुविधा पहुंचाने से है।
प्रशासन को तत्काल रामनगर की सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर ध्यान देना चाहिए।
